नाहं जाणामि कंपि देवं न दईवं, णत्थि इसरो णियन्ता।
णत्थि सग्गभूमि ण णिरयं।
णो जगकत्ता णो विकत्ताय ण य जगईसरो कोवि।
ण रक्खओ ण भक्खओ।
ण य कालाईओ आदित्ठो दन्दनाईओ।
कम्मुणो चेव दण्डं।
हं सयमेव सट्ठा भोत्ता य मे सुहदुह – पियाप्पिअसंजोगाण।
अप्पसरियो जीवो सव्वाण सुहुमतिसुहुमेसु।
नत्थु कोवि कयापि दुहिओ मया।
सया मे इइ संवेअणा।
सच्चस्स मग्गा बहवे, सच्चो य एगरुबो णवरं।
समया मे मणो दुव्विहअवस्थासु।
मम पत्थणा -निज्जरउ अन्नाणकंमं।
शुद्धसासयरुवो हं इइ अत्थु मे सद्दंसणंअन्ते- ण य भवउ चवियं मे पयं मोक्खमग्गओ।